Category: anxiety disorder

संकट के समय में प्रोडक्टिव कैसे रहे ?

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संकट के समय प्रोडक्टिव रहने के लिए हमें अनुशासन का पालन करते हुए धीरे से काम लेना चाहिए |

वास्तव में संकट का समय हमारी लाइफ में हमें परखने के लिए आता है, संकट के समय में हमें सही काम सही दिशा निर्देशन में करना चाहिए,

क्योंकि यह हमारी जिंदगी के परीक्षण का समय है और यही वह समय है, जिसमें लोग अपनी काबिलियत का परीक्षण कर सकते हैं और अपनी क्षमता का विस्तार अधिक संपन्न बनने के लिए कर सकते हैं |

बहुत से लोग जो संकट के समय में भी अनुशासन और का पालन नहीं करते और धैर्य से काम नहीं लेते उनकी लाइफ बिखर जाती है, तो हमें संकट के समय में उभरने के लिए उस समय का सदुपयोग करना है |

जानते हैं कि
किस तरह हम संकट से उबरने के लिए समय का सदुपयोग कर सकते हैं?
किस तरह एक प्रोडक्टिव इंसान बन सकते हैं ?

संकट के समय से कैसे उबरे ?

  1. उस काम की चिंता मत करो जो तुम्हारे बस से बाहर है |
  2. अपने आरामदायक जीवन से बाहर आने की हिम्मत करो |
  3. संकट के समय अपनी भावनाओं को अपना व्यवहार ना बनने दो |
  4. बुरी से बुरी स्थिति में भी कुछ अच्छा निकालने की कोशिश करो |
  5. सही दिशा में सही काम करते रहो |
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चिंता और चिंतन में क्या अंतर है ?

chinta aur chintan
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चिंता और चिंतन में अंतर (anxiety and brain storming) :

हमारे जीने का उद्देश्य क्या है (what is the purpose of our life in hindi) यह प्रश्न हमारे मन में तब आता है जब हमारी लाइफ में बहुत सी परेशानियां चल रही होती है , यह प्रश्न उस समय नहीं आता जब हमारी लाइफ बहुत अच्छी चल रही होती है |

हर चीज को लेकर हमारे पास 2 नजरिए हो सकते हैं पहला चिंता (anxiety) और दूसरा चिंतन (brain storming)

हम चिंता और चिंतन को इस उदाहरण से समझ सकते हैं |

चिंता (anxiety):

जब इंसान को चिंता होती है तो उसके विचार कुछ इस तरह के होते हैं |

  1. मुझे ही डिप्रेशन क्यों हुआ ( why I’m depressed ) ?
  2. मैं ही बीमार क्यों हुआ (why I’m ill)?

चिंतन (brain storming) :

और जो व्यक्ति चिंतन करता है उसके विचार कुछ इस प्रकार के होते हैं |

  1. मुझे डिप्रेशन से बाहर आने के लिए क्या करना होगा (what should I do to cure depression) ?
  2. किस तरह मेरी यह बीमारी खत्म होगी (how to cure this illness)?

चिंता और चिंतन हमारी समझ पर निर्भर करता है, एक चीज को लोग अलग-अलग नजर से देखते हैं |

अगर कोई व्यक्ति मानसिक बीमारी का शिकार (mental illness) है तो उसकी चिंता क्या होगी कि उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है (why I’m depressed) , लेकिन अगर वह इस बारे में चिंतन करें कि ऐसा क्या करना चाहिए, जिससे उसकी मानसिक परेशानी खत्म हो जाए (how to cure depression)|

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social fear treatment कैसे होता है

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social fear treatment

When you are in social fear, it is very difficult to face people.

I can tell from my experience, when I was suffering from depression and anxiety , I used to come in contact with very few people.

Gradually I locked myself up and got away from people

Then I slowly changed my lifestyle and absorbed my mind.

After observing, I found that we continue to learn something from the experiences that we have had in our life, due to which our experiences change in our convictions and that beliefs
Because of this we begin to understand illusion as reality.

This was the case with me, believing a lie to be true , running away from people on their own, but after understanding the truth and the reality of lies, social anxiety is completely eradicated.

सोशल फियर ट्रीटमेंट इन हिंदी

जब आपको social fear हो , तब लोगों का सामना करना बहुत मुश्किल होता है |

मैं अपने अनुभव से बताऊं तो, जब मैं डिप्रेशन और एंजाइटी से ग्रसित था , तों में बहुत कम लोगों के संपर्क में आता था |

धीरे-धीरे मैंने अपने आप को lockdown कर लिया और लोगों से दूर कर लिया

फिर मैंने अपनी लाइफ स्टाइल को धीरे-धीरे बदला और अपने मन को अब्जॉर्ब किया

ऑब्जर्व करने के बाद मैंने पाया कि हमारी लाइफ में जो जो अनुभव हमें हुए उससे हम कुछ ना कुछ सीखते रहते हैं , जिसकी वजह से हमारे अनुभव हमारे दृढ़ विश्वास में बदल जाते हैं और उस विश्वास
की वजह से हम लोग illusion को reality समझने लगते हैं |

यही मेरे साथ हुआ था ,एक झूठ को सच मानकर लोगों से खुद ही दूर भागता था , लेकिन सच और झूठ की वास्तविकता को समझने के बाद सोशल एंजाइटी पूरी तरह खत्म हो जाती है |

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bimari ka vaham by Deepak Yadav

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मेरे दिमाग में बीमारियों के विचार क्यों आते रहते हैं?
Why do thoughts of diseases keep coming in my mind?

If you spend your daily routine to get information about diseases, then it is natural to get the thought of ​​diseases in your mind.

अगर आप अपनी दिनचर्या बीमारियों की जानकारी को प्राप्त करने में लगाते हो, तो बीमारियों के विचार का आपके मन में आना स्वाभाविक है |

Actually, disease is the name of a person’s condition, just as water is the name of a liquid state, snow is in solid state, there is cloud in gas state.

वास्तव में देखा जाए तो बीमारी व्यक्ति की अवस्था का नाम है , जिस तरह जल का तरल की अवस्था में नाम पानी होता है, ठोस अवस्था में बर्फ होता है गैस अवस्था में बादल होते हैं |

In the same way, the physical and mental states of human beings are called diseases, in fact, they are not just a disease but a state.

उसी तरह मनुष्य के शारीरिक और मानसिक अवस्थाओं को बीमारियां कहा जाता है, वास्तव में वह बीमारी नहीं एक अवस्था मात्र है |

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nakaratmak logo se kaise bache ?

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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जिस तरह समाज एक इंसान को प्रभावित करता है , उसी तरह एक इंसान पूरे समाज को प्रभावित करता है |

हर समाज में हर जगह कुछ सकारात्मक लोग भी होते हैं और नकारात्मक लोग भी होते हैं |

लेकिन वह लोग जो हमारे आसपास सबसे ज्यादा रहते हैं , हमें सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं |

हमें ऐसे नकारात्मक कारको से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  • अपने आसपास के नकारात्मक लोग की सूची बनाइए |
  • अब इनमें से कुछ लोग ऐसे होंगे जिन्हें आप छोड़ सकते हैं, जैसे कि आपके दोस्त जो बहुत ज्यादा नकारात्मक है |
  • और कुछ लोग जिन्हें आप नहीं छोड़ सकते जैसे कि आपके फैमिली मेंबर , अब आपके परिवार के लोगों को physically तो नहीं छोड़ सकते लेकिन mentally छोड़ सकते हैं |
  • आपको सबसे ज्यादा वह चीज प्रभावित करती है जहां आप सबसे ज्यादा समय व्यतीत करते हैं |

मुझे कमेंट में बताइए क्या आप आपके समय का सही इस्तेमाल कर रहे हैं ? अगर नहीं तो क्यों ?

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