Updated : Jun 25, 2020 in Best book on depression

Depression ko khatam karne ke 10 Aasan tarike

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डिप्रेशन को खत्म करने के 10 आसान तरीके |

इस ब्लॉग के माध्यम से हम बताएंगे कि किस तरह
आप खुद अपने डिप्रेशन को इन 10 तरीकों को अपनाकर डिप्रेशन से बाहर आ सकते हैं |

1. अपने आपको प्रकृति को समर्पित कर दीजिए

अब से हमें कुछ सही और अच्छी जानकारी अपने आपको रोज देना है, अब अपने आपको पूर्ण रूप से ईश्वर या प्रकृति को समर्पित कर दीजिए |

समर्पित से मेरा मतलब यह है कि आज से आपको अपने बीमारू विचार को त्यागने हैं, जो आपको परेशान करते हैं |

लेकिन उन विचारों को मन से नहीं त्याग सकते |

अभी के लिए सोच लो आपके मन में वह विचार नहीं आने चाहिए जिन विचारों को सोचकर आप परेशान हो जाते हो , पर यह विचार तो पहले से हीं आपके अंदर मौजूद है |

आपको उन विचारों से पीछा छुड़ाने के लिए अपने आप को सरेंडर करना पड़ेगा |

मान लो पुलिस किसी चोर को पकड़ने के लिए पीछा कर रही है, उस चोर को कितना डर रहेगा और यही अगर वह खुद को सरेंडर कर दे तो क्या उसे कोई डर होगा |

इसलिए सबसे पहले अपने आप को सरेंडर कर दो |

अपने आप को सरेंडर करने से आपकी ईगो अपना प्रभाव दिखाना खत्म कर देगी , जिस तरह चोर सरेंडर कर देने के बाद अपनी भाग जाने की कोशिशों को छोड़ देता है |

आपको सरेंडर कर देने के बाद, अपने आप को ठीक करने के बारे में बिल्कुल नहीं सोचना है, क्योंकि आप अब सिर्फ कर्म करोगे आपके भाग्य को प्रकृति को समर्पित कर चुके हैं |

सरेंडर से मतलब सिर्फ और सिर्फ आपके ठीक होने के परिणाम को छोड़ना है, हमारे कर्म को नहीं छोड़ना |

समर्पण को और अच्छी तरह से समझने के लिए हम इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि आप ट्रेन से दिल्ली जा रहे हो |

अब आप ट्रेन में बैठकर बस यह सोच रहे हो बार-बार की दिल्ली कब आएगा, कब दिल्ली आएगा ?

यहां पर ट्रेन में बैठकर जाना आपका कर्म है और दिल्ली पहुंचना आपका भाग्य है |

यहां पर सरेंडर करने से आशय बार-बार यह सोचकर दुखी नहीं होना है कि कब दिल्ली पहुंचे क्योंकि सोचने से आप दिल्ली नहीं पहुंचोगे |

आपके सोचने से ट्रेन की गति बढ़ नहीं जाएगी |

अपने आप को दुखी करने से अच्छा है, अपने आप को सरेंडर कर दो |

इसी उदाहरण की तुलना हम अपनी परिस्थितियों के हिसाब से अपने आप से करें, तो यहां पर डिप्रेशन से बाहर निकालना हमारी मंजिल है |

आज से इस वाक्य को बार-बार पड़े और इसे अंदर तक जाने दे |

मुझे अब किसी बात का डर नहीं है, जो होना हो होजाए, पर मैं अपने कर्म को पूरी ईमानदारी से करूंगा |

उपरोक्त वाक्य को अपने दिल से बोलियो पूरा अंदर तक जाने दे, इसे इमोशन के साथ feel करके बोलिए |

Note : यह ब्लॉग डिप्रेशन कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लाइफस्टाइल है, जिसे बदला जा सकता है एक e-Book लिया गया है |

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Agar Aap Bhi Depression Aur Anxiety Se Bahut Jyada Pareshan Hai Toh Aapko Yah e-Book Jarur Padna Chahiye , Jo Aapki jindgi Badal Sakti Hai.

2. कॉज एंड इफेक्ट के नियम को समझकर

Cause & effect नियम के अनुसार हर cause का एक effect होता है और हर effect का एक Cause होता है |

बिना Cause के कोई इफेक्ट नहीं होता, हर बीमारी का कोई ना कोई Cause होता है, वास्तव में डिप्रेशन का भी Cause है, लेकिन इस cause का पता किसी को नहीं होता , यहां तक कि रोगी भी नहीं जानता यह उसके साथ क्या हो रहा है, क्यों हो रहा है?

मैं यह तो नहीं बता सकता कि आपको डिप्रेशन किस cause की वजह से हुआ, हां लेकिन इतना जरूर बता सकता हूं कि आपकी लाइफ स्टाइल उन लोगों की लाइफ स्टाइल की तरह है, जो डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति की होती है |

आप आपकी लाइफ स्टाइल को बदल कर डिप्रेशन से बाहर आ सकते हैं, उन लोगों को खोजिए जो अपनी जिंदगी में बहुत खुश है |

जो हेल्थ, वेल्थ और हैप्पीनेस तीनों दृष्टिकोण से सफल हैं, उनकी लाइफ स्टाइल को कॉपी करें |

वास्तव में जब आप डिप्रेशन में नहीं थे, तब आप जाने या अनजाने में उन लोगों को कॉपी कर रहे थे, जो डिप्रेशन से ग्रसित है या डिप्रेशन में जाने वाले होते हैं, इसलिए आपकी मानसिकता उन लोगों की तरह है, जो डिप्रेस्ड लोगों की मानसिकता होती है |

इस डिप्रेशन की मानसिकता को बदलने के लिए आपको ऐसे लोगों की लाइफ स्टाइल को कॉपी करना होगा जो आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहे हैं |

जिससे आपकी समझ गहरी होती चली जाएगी जैसे कि हम पहले से ही पढ़ चुके हैं, हर cause का एक effect होता है|

अगर हम अपने डिप्रेशन के cause को देखना चाहे, तो वह यह है कि जाने-अनजाने में डिप्रेस्ड लोगों की लाइफ स्टाइल को कॉपी करना और जिसका इफेक्ट डिप्रेशन है |

डिप्रेशन की मानसिकता बनने में काफी समय लगता है, अगर लगातार हम उसी दिशा में चलते रहे |

तब जाकर डिप्रेशन की स्थिति बनती है, लाइफ में हर चीज के पीछे cause-and-effect होता है, बस हमें उसे सही नजरिए से देखने की जरूरत होती है |

3. खुद को अपना लो खुद का विरोध मत करो

जब आप डिप्रेशन में हो तो निश्चित रूप से आप आपकी मानसिक गतिविधियों से परेशान होंगे, वास्तव में हमारा मन सॉफ्टवेयर की तरह एक टूल है |

जोकि हमारे द्वारा अपने past में की गई प्रोग्रामिंग के अनुसार चलता है, यह उसी तरह के आउटपुट देगा, जिस तरह के इनपुट हमने अपने माइंड को दिए हैं |

परेशानी वहां आती है, जब हम आशा रखते हैं कि और कुछ अच्छा आना चाहिए , चाहे उसकी प्रोग्रामिंग कितनी ही खराब करें |

लेकिन हम यह भूल जाते हैं, कि जो हमारे साथ हो रहा है वह सिर्फ और सिर्फ एक प्रभाव मात्र है, उस कंडीशनिंग का जो हमने जाने-अनजाने में हम करते आए हैं |

मैं आशा करता हूं कि आप कॉज एंड इफेक्ट के low को समझते होंगे |

डिप्रेशन इफेक्ट मात्र है ,जिसका cause हमारी पास्ट कंडीशनिंग है |

तो आप वह नहीं है जो पहले थे आप तो एक नदी में बहते हुए पानी की तरह हो जो निश्चित रूप से हर समय मानसिक और शारीरिक रूप से बदल रहे हो |

आप अपने आपका विरोध करने की जगह अपने आपको अपना लो क्योंकि आप वह नहीं हो जो आप सोच रहे हो न हीं आप वह हो, जो आपको दर्पण में दिख रहे हो , आप तो एक साक्षी मात्र हो जो इस मानसिक और शारीरिक परिवर्तन को देख सकते हो |

अगर आप देखना चाहते हो , किस तरह आप मानसिक और शारीरिक रूप से हर समय बदल रहे हो |

आप शारीरिक परिवर्तन को देखने के लिए अपने बचपन की तस्वीर को देख सकते हैं और मानसिक परिवर्तन को देखने के लिए आपके past को याद कर लो क्या आपके विचारों में परिवर्तन नहीं हुआ ?

अगर नहीं हुआ होता तो शायद आपको डिप्रेशन भी नहीं होता |

इन विचारों के परिवर्तन से डरकर अपने आपसे मत भागो, अपने आपको अपना लो और साक्षी बनकर अपने आपमें होने वाले परिवर्तनों को देखो |

इस अवस्था मैं आपको यह लगता है, मेरे साथ यह सब क्यों हो रहा है |

इसका जवाब बहुत ही आसान है क्योंकि आपने अपने आपको इस अवस्था के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रोग्राम किया है ,इसलिए आपके साथ ऐसा हो रहा है |

निश्चित रूप से आप अभी जिस अवस्था में हो कुछ समय पश्चात उस अवस्था में नहीं रहोगे |

क्योंकि परिवर्तन संसार का नियम है, अगर परिवर्तन ना होता तो आप निश्चित रूप से इस अवस्था में नहीं होते |

आज आपकी जो भी मानसिक अवस्था है, उसका विरोध मत करो सिर्फ अपने आप को अपना लो और मन में यह बात याद रखो कि आप आपका मन नहीं हो |

आप साक्षी हो जो मन में हो रही उथल-पुथल को देख रहे हो, अपने मन का विरोध मत करो, अपने आप का विरोध मत करो और मन में अच्छे विचारों को डालो |

4 . दूसरा हाथ आजमाओ

हमारा मन और शरीर परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए मानसिक गतिविधि का प्रभाव शरीर पर पड़ता है और शारीरिक गतिविधि का प्रभाव मन पर भी पड़ता है |

मानसिक अवस्था को बदलने के लिए हमें कुछ शारीरिक बदलाव भी करने पड़ेंगे |

आज तक आप जिस भी हाथ से खाना खा रहे हो या ज्यादातर जो भी काम आप जिस हाथ से करते थे उसकी जगह उस हाथ का इस्तेमाल करें जिसका इस्तेमाल आप कम करते हैं |

आज से आप सारे काम आपके उल्टे हाथ से करेंगे, क्योंकि हमें अपनी लाइफ स्टाइल बदलना है |

अगर कोई कार्य बहुत ही ज्यादा आवश्यक हो तो आप उसे आपके सीधे हाथ से भी कर सकते हैं |

इस अध्याय को पूरा पढ़ लेने के बाद आप एक लिस्ट बनाओ जिसमें आप जो भी रोजमर्रा की जिंदगी में काम को करते हो और उसके सामने वह हाथ लिखो जिसका इस्तेमाल नहीं करते |

मैं शुरू से ही अपने उल्टे हाथ का ज्यादा इस्तेमाल करता हूं, इसलिए मैंने डिप्रेशन के दौरान कुछ इस तरह बदलाव किए जिसका मुझे बहुत बेहतरीन परिणाम मिला |

आप भी इस तरह की एक लिस्ट बनाओ

काम पहले आज से
खानाराइटलेफ्ट
चाय लेफ्टराइट
क्रिकेटराइटलेफ्ट
किताबोंराइटलेफ्ट


इस तरह आप भी एक लिस्ट बनाओ लिस्ट बनाते समय उस हाथ का इस्तेमाल करे जिसका उपयोग आपने पहले नहीं किया

5. वास्तविक डर और आभासी डर मैं अंतर जानकर

डर जीवन का हिस्सा है, बिना डर के हमें बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है |

मान लो अगर हम नहीं जानते कि आग में जाने से जल जाते हैं, तो शायद हम आग में जल जाते और बहुत बड़ा नुकसान कर बैठते |

डर हमें मार्गदर्शन देता है कि शायद जो तुम कर रहे हो वह गलत है |

लेकिन डर के दो प्रकार होते हैं एक आभासी डर और दूसरा वास्तविक डर |

वास्तविक डर, सच्चाई के आधार पर होने वाला डर जोकि बहुत जरूरी है, मान लो अगर आपको डर है कि आप 10 मंजिला इमारत से कूदे तो आप मर सकते हो, यह एक वास्तविक डर है |

अगर यह डर हमारे अंदर है तब तक तो हम सुरक्षित है |

आभासी डर : हमारे मरने के बाद हम स्वर्ग में जाएंगे नर्क में |

यह एक आभासी डर है, इसका आभास तब भी होता है, जब उसका वजूद नहीं होता है |

वास्तविक डर हमारे जीवन को खतरों से बचाने में अहम भूमिका निभाता है, वही आभासी डर बिना किसी डर के डर का आभास कराता है |

अगर आप किसी बात से डर रहे हो, तो आपको पहले समझना चाहिए कि आपका डर वास्तविक है या आभासी |

मैंने अक्सर मानसिक बीमारी में देखा है कि मनोरोगी का डर आभासी होता है |

मैं अपना खुद का अनुभव बताऊं तो मुझे भी एक आभासी डर था जिसका कोई अस्तित्व नहीं है, मुझे चारों तरफ मन में कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाई देती थी जो कि मेरे मन की थी |

आभासी डर हमारे अंदर नकारात्मक प्रभाव की वजह से आता है |

क्या आपने अपने डर को तोला है, अगर नहीं तो अपने डर को समझिए क्या आपका डर वास्तविक है या कोई भ्रम है |

अगर यह आपका भ्रम है तो आपको अपनी लाइफ स्टाइल को बदलना चाहिए |

6. अहंकार, मेरा स्वरूप है

जब हम डिप्रेशन की अवस्था में होते है, तब माइंड में इगो होता है, जब माइंड में इगो होता है, वह अपने आप को पूर्ण समझता है |

ईगो शब्द का हिंदी अर्थ अहंकार होता है और अहंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है जिसमें अहम का अर्थ होता है मैं अर्थात अहम का आकार ही अहंकार होता है |

यह वही है जिसके कारण हमें लगता है कि हम सब अलग अलग हैं, मैं तुमसे अलग हूं और तुम मुझसे अलग हो |

यह वही है जिसके कारण आईडेंटिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक बीमारी हुआ |

अगर हम आसान शब्दों में कहें तो यह वही है जिसके कारण हम अपने आपको औरों से अलग समझते हैं |

यह वही है जिसके कारण हम चीजों को या लोगों को एक दूसरे से compare करते हैं |

यह वही है जिसके कारण हमें लग रहा है कि –

मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है |
मैं अच्छा हूं |
मैं बुरा हूं |
वह मुझसे अच्छा है |
वह मुझसे बुरा है |
मैं उससे लंबा हूं |
वह मुझसे चौड़ा है |

अगर आपको डिप्रेशन है, तो निश्चित रूप से आपके माइंड को ईगो ने ओवरटेक कर रखा है |

ईगो को हम समझ से सही कर सकते हैं, अगर मैं समझ जाऊं कि मैं तुमसे अलग नहीं हूं, तुम और मैं एक ही हैं बस लगते अलग-अलग हैं |

इसे समझने के लिए हम मिट्टी के दो मटको से समझ सकते हैं, जो आकार में अलग अलग है लेकिन दोनों हैं तो मिट्टी ना |

बस मटको को यह भ्रम हो सकता है कि वह अलग अलग है, मिट्टी के लिए दोनों में कोई अंतर नहीं है |

वास्तव में हम सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिस तरह हम सब मिलकर पेड़ों को CO2 दे रहे हैं और सब पेड़ मिलकर हमें ऑक्सीजन दे रहे हैं, इस आधार पर हम कह सकते हैं कि हमारा ego एक भ्रम है जिसका रियलिटी से कोई लेना-देना नहीं है |

7. अनुशासन का पालन करें

अनुशासन का पालन करें, यह एकमात्र ऐसा गुण है, जो हर सफल व्यक्ति में पाया जाता है , आप इतिहास के किसी भी व्यक्ति के बारे में पढ़ लो, उसकी सफलता का श्रेय अनुशासन के गुण को जाता है |

इसके विपरीत वह लोग जो अनुशासन का पालन नहीं करते, आपको डिप्रेस्ड या दुख ही मिलेंगे क्योंकि यह उनके लाइफस्टाइल का अंतर है |

डिप्रेस्ड लोग अपने लाइफ में किसी अनुशासन से नहीं चलते हैं , वह सिर्फ अपने मन में जो आता है, उसी के अनुरूप कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अनुभव नहीं होता कि यह सब उनके साथ क्यों हो रहा है |

मैं अपने अनुभव से बता सकता हूं कि मैं अवसाद होने के पूर्व किस तरह अनुशासन का पालन नहीं करता था |

मेरे मन में जो भी विचार आता था मैं उसी के अनुरूप कार्य करता रहता था, मेरे इस अवगुण के कारण पता नहीं कब में डिप्रेशन का शिकार हो गया |

अनुशासन वास्तव में सीधी और सुलझी हुई राह है, जो की राही को सफलता तक पहुंचाने में बहुत मदद करती है |

सच कहूं तो एक सफल और असफल
व्यक्ति में सबसे बड़ा अंतर अनुशासन का ही है |

अनुशासन को आसान भाषा में समझने के लिए हमें इसे प्लानिंग भी कह सकते हैं, अगर आपने प्लान कर रखा है, आपको इस डिप्रेशन से बाहर आना है तो निश्चित रुप से आपको प्लानिंग करनी होगी और उसके अनुरूप चलना होगा |

यदि आप अपने मन के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, जैसा दिमाग में आया करने लग गए तो शायद कभी भी डिप्रेशन से बाहर ना आओ |

मैं अपने आपके अनुभव से बता सकता हूं उस समय जब मैं डिप्रेशन में था तो मैंने कठोर अनुशासन का पालन किया जिसका प्रतिफल यह है कि आज मैं डिप्रेशन से मुक्त ही नहीं अपितु हजारों लोगों को गाइड कर चुका हूं कि किस तरह डिप्रेशन से बाहर निकला जा सकता है |

8. प्रकृति ही जीवन है

हम सब इस प्रकृति का ही हिस्सा है , क्या आप बिना पेड़ पौधों के अपने जीवन की कल्पना भी कर सकते हैं |

बिना प्रकृति के हम एक पल भी जीवित नहीं रह सकते सोचो क्या हो अगर प्रकृति हमें हवा, पानी, मिट्टी, अग्नि और जगह ना देती तो क्या हमारा जीवन संभव था |

प्रकृति ने हमसे कोई किराया नहीं लिया है, हमें रोज अपने दिनचर्या से समय निकालकर थोड़ा सा प्रकृति के साथ व्यतीत करना चाहिए |

जब से आधुनिक क्रांतिकारी आई है, तब से लगभग हमने प्रकृति के से अपना संबंध खत्म कर लिया है |

सुबह शाम रोज हमें प्रकृति से जुड़ा होना चाहिए इस जन्म के लिए उनके द्वारा दी गई हवा, पानी के लिए हमें प्रकृति का शुक्रिया करना चाहिए |

मेरे हिसाब से प्रकृति ही सब कुछ है, बिना प्रकृति के कुछ भी संभव नहीं है,प्रकृति ही भगवान है, प्रकृति ही खुदा है और प्रकृति ही ईश्वर है |

रोज थोड़ा समय प्रकृति के साथ व्यतीत करो और प्रकृति द्वारा हमें दिए गए फ्री गिफ्ट के लिए उसका शुक्रिया करो |

9. आप आपके विचारों को बदल कर अपने आप को बदल सकते हैं |

क्या आप जानते हो हम हमारे कर्मों को बदल कर विचारों को बदल सकते हैं और विचारों को बदलकर कर्म को बदल सकते हैं |

विचारों को बदलकर हम हमारा आने वाला कल भी बदल सकते हैं, एक विधि जिसके द्वारा हम हमारे मन में चल रहे विचारों को नई दिशा दे सकते हैं|

ऑटो सजेशन बहुत ही आसान तकनीक है , जिसके माध्यम से हम हमारे अंदर चल रहे विचारों में परिवर्तन ला सकते हैं |

ऑटो सजेशन में आपको सिर्फ वह बोलना है, जिस तरह का फ्यूचर आप चाहते हो, आप ऐसा मत बोलो कि मुझे ऐसे विचार नहीं आने चाहिए , जो मुझे परेशान करते हैं |

अगर आप ऐसा बोलते हो तो आपके माइंड में पहले से ही किसी परेशानी के साथ लिंक कर रखा है |

आपको हमेशा अपने मन में ऐसा कुछ बोलना है, जो बार-बार आपको उस विचार तक ना पहुंचाएं जिससे आप दुखी होते हो |

आपको कुछ इस तरह से ऑटो सजेशन देना है
मैं सुखी हूं |
मैं समृद्ध हूं |
मैं स्वस्थ हूं |

यह 3 बातें आपको बोलना है और इन्हें हमेशा बोलना है , अगर यह आपको झूठ लगे तब भी बोलना है |

अगर आप जानते हो आपका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है आप अमीर नहीं हो और आप सुखी नहीं हो तब भी आपको हर रोज यह 3 लाइनें बोलनी है |

10. खुद को जानकर


इमोशन

इमोशन का शाब्दिक अर्थ है एनर्जी इन मोशन अगर हम इसे अन्य शब्दों की में व्यक्त करना चाहे तो हम बोल सकते हैं कि किस तरह कि एनर्जी हम में flow हो रही है |

दूसरे शब्दों में हम इसे स्टेट ऑफ माइंड भी कह सकते हैं, हमारा माइंड हर वक्त स्टेबल नहीं होता |

इसमें हर समय अलग-अलग तरह की भावनाएं रहती है, विचारों का सीधा असर इमोशन पर होता है |

इमोशन को एक सकारात्मक या नकारात्मक अनुभव के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शारीरिक गतिविधि से जुड़ा होता है |

आमतौर पर इमोशन एक वर्तमान की फीलिंग को प्रस्तुत करता है, मुख्य रूप से क्रोध, घृणा, भय,खुशी उदासी और आश्चर्य छह प्रकार के इमोशन होते हैं |

डिप्रेशन के समय उदासी नामक इमोशन सबसे ज्यादा प्रभाव कारी होता है |

जिसकी वजह से खुशी नामक इमोशन लुप्त हो जाता है, यह सभी इमोशन हमारे द्वारा दिए गए थॉट पर निर्भर करते हैं |

जाने या अनजाने में जिस प्रकार के विचार माइंड में प्रवेश करता है, उसी तरह की एनर्जी का flow हमारे माइंड में होता है |

व्यवहार

अपने व्यवहार को इस प्रकार चेंज करो, जैसा आप बनना चाहते हो, आपको शारीरिक और मानसिक रूप से ऐसे लोगों को कॉपी करना है, जिस तरह का व्यवहार आप अपने आप में चाहते हैं |

व्यक्ति के व्यवहार को देख कर ही पता चलता है कि वह किस तरह की मानसिक व शारीरिक परेशानी से गुजर रहा है |

जिस तरह का अपना बिहेव होगा, उसी तरह आपकी बॉडी लैंग्वेज होगी , उसी तरह के आपके इमोशन होते हैं, जिस तरह का आपका व्यवहार होता है |

वास्तव में अगर आप डिप्रेशन में हो, तो आपने जाने अनजाने में दूसरे के बिहेव को कॉपी किया है |

आप में डिप्रेशन के सिम्टम्स है, इसका मतलब आपका बिहेवियर उन लोगों की तरह था, जो डिप्रेशन में गए |

वह सब कुछ करना छोड़ दो जो कि एक डिप्रेस्ड व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में करता है, उन लोगों को देखो, सुनो, पढ़ो और समझो जो healthy हो wealthy हो और सबसे जरूरी सुखी हो , आपकी पर्सनालिटी उसी तरह की बन जाएगी

तीनों चीजों का बैलेंस लाइफ में बहुत ज्यादा जरूरी है |

ऐसे लोगों के व्यवहार को सीखो और उन्हें कॉपी करो |

ऐसे लोगों को खोजिए जिनके पास तीनों चीजों का बैलेंस हो और उनके behavior को बारीकी से observe करो , वह किस तरह अपनी लाइफ को मैनेज करते हैं |

ऐसे लोगों को फॉलो करो, ऐसे लोगों से मेरा मतलब यह नहीं कि जो बहुत ज्यादा अमीर तो हो लेकिन खुश नहीं और ना ही वह जो खुश तो बहुत हो लेकिन उसके पास पेट भरने के पैसे नहीं हो या वह जो पूरी तरह स्वस्थ हो लेकिन उसके पास ना तो खुशी हो ना ही पैसा हो |

ऐसे व्यक्ति को खोजो जिनके पास तीनों चीजों का बैलेंस है, यह ही एक सफल व्यक्ति की पहचान है उसी के व्यवहार को हमें फॉलो करना है |

कर्म

आज हम वह है जैसे कर्म हमने कल किए थे और आने वाला कल हमारे आज पर निर्भर करता है, एक सच जो शायद आप नहीं जानते |

आपने अपनी past life में कुछ ऐसा किया है जो आम तौर पर सभी डिप्रेस्ड लोग करते हैं |

अपने खुद के अनुभव से कह सकता हूं, कि जब मैं डिप्रेशन में गया था, उसके पहले मेरे जो कर्म थे |

वह उस इंसान की तरह थे, जो डिप्रेशन में जाने वाला है (इसके कुछ अपवाद भी हो सकते हैं)

हर व्यक्ति के कर्म गलत नहीं होते, बहुत से लोगों के साथ आश्चर्यजनक घटना भी घट जाती है, जिसके कारण भी व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है |

लेकिन फिर भी आपको इस तरह के कर्म करने चाहिए जो एक सफल व्यक्ति के कर्म होते हैं |

मेरे अनुसार सफल व्यक्ति वह होता है, जिसके पास हेल्थ, वेल्थ और हैप्पीनेस का बैलेंस हो , आपके अनुसार जो भी सफल लोग हैं, उनके कर्मों का पता लगाइए और उनको अपने जीवन में उतार लीजिए|

अगर आपने अपने कर्मों को सही दिशा में ले गए तो निश्चित ही आपका कल आज से बेहतर होगा |

11. एक सफल व्यक्ति क्या करता है, जो एक असफल और डिप्रेस्ड व्यक्ति नहीं करता हैं

आपके अनुसार सफल व्यक्ति कौन हैं, मेरे अनुसार तो सफल व्यक्ति वह है, जिसने अपने आपको काबिल बनाया है, जिसके पास अच्छा स्वास्थ्य अच्छी समृद्धि और जो खुश हो अगर एक व्यक्ति के पास यह तीनों चीजें हैं, तो वह एक सफल व्यक्ति है |

इन तीनों चीजों का होना अति आवश्यक है, अगर इन तीनों में से एक भी चीज गायब है, तो वह सफल नहीं है |

मान लो आप एक अरबपति हो लेकिन आप खुश नहीं हो तो क्या इसे सफलता कहेंगे ?

और दूसरे केस में आप बहुत स्वस्थ व्यक्ति हो और साथ में आप एक करोड़पति हो लेकिन आप खुश नहीं हो तो क्या इसे सफलता कहेंगे?

तब भी आप एक सफल व्यक्ति नहीं हो |

एक और केस है जिसमें आपके पास इतना पैसा है अगर आप लाइफ टाइम काम ना भी करो तो आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, आप आपकी फैमिली को सपोर्ट करने के लिए फाइनेंशली फ्री हो , ऊपर से आपका स्वास्थ्य भी एकदम ठीक है |
आपको कोई बीमारी नहीं है, आप हेल्दी इंसान हो और आप आपकी जिंदगी से बहुत खुश हो |
क्योंकि आपके रिश्ते बहुत अच्छे हैं, आपकी जिंदगी से आप पूरी तरह संतुष्ट हो, क्योंकि आपके पास सब कुछ है, आपके पास दौलत है, स्वास्थ्य है, समय है और आप पूरी तरह अपनी लाइफ से संतुष्ट हो |

अगर आपके पास health, wealth और हैप्पीनेस है तो आप एक सफल व्यक्ति हो, अगर आपके पास यह तीन चीजें नहीं है तो आपको उन लोगों से सीखना होगा जिनके पास ही तीनों चीजें हैं |

  1. डिप्रेशन को खत्म करने के लिए आपको आपकी लाइफ स्टाइल बदलना है |
  2. हमें रोजाना अनुशासन का पालन करना है |
  3. सुबह रोज 6:00 बजे से पहले उठना है |
  4. हमें नकारात्मक प्रभाव वाली चीजों से दूर रहना है|
  5. पोर्नोग्राफी का इस्तेमाल नहीं करना है |
  6. रोजाना हमें स्वास्थ्य को बढ़िया बनाने के लिए
    योगा, मेडिटेशन, प्राणायाम, खेल खेलना, व्यायाम करना |
  7. रोजाना हमारी समृद्धि बढ़ाने के लिए पैसे कमाने हैं और उन पैसों का संचय करना है |
  8. हमेशा खुश रहने के लिए हमें हमारी समझ बढ़ाना है और समझ बढ़ाने के लिए हमें रोज आध्यात्मिक किताबें या आध्यात्मिक प्रवचन को सुनना है |
  9. हमें सफल व्यक्ति की आदतों को अपनाना है और डिप्रेस्ड या असफल व्यक्ति की आदतों को छोड़ना है|
  10. उपरोक्त लिखे सभी नियमों का पालन करना है |

Note : Agar Aap Aapki Mental Health Ko Lekar Pareshan Hai Toh Ye e-Book डिप्रेशन कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लाइफस्टाइल है, जिसे बदला जा सकता है Natural Tariko Se Aapki Jingi Badal Sakti Hai , Download e-Book Par Click Kare Aur abhi ebook ko kharide Agar Aap nhi jante Kis tarah Is e-Book ko Kharidna Hai Toh yaha click kare.

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