Tag: cause of depression in hindi

Kya Depression pagalpan hai?

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अवसाद पागलपन नहीं है |

वास्तव में अवसाद पागलपन नहीं है, अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन से गुजर रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं की वह व्यक्ति पागल है |

अवसाद और पागलपन मन की दो अलग-अलग मानसिक अवस्थाएं हैं |

अगर आप डिप्रेशन में हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पागल हो, इसका मतलब यह है कि आप एक सही राह से भटक गए हो |

अगर आप डिप्रेशन से बाहर आना चाहते हो तो आप को सही राह पर चलना होगा |

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Ek galti jisne mujhe depressed kar diya

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एक गलती जिसने मुझे उदास कर दिया |

दुनिया में हर चीज cause-and-effect की वजह से होती है, मेरे डिप्रेशन के पीछे भी एक कॉल था |

Depression का cause हर एक व्यक्ति के लिए अलग-अलग या एक समान हो सकता है,
लेकिन एक ही नहीं हो सकता है |

अगर मैं अपने डिप्रेशन के cause की बात करूं तो वह था addiction of pornography.

फिर मैंने अपनी इच्छाशक्ति से addiction of pornography को addiction of spirituality
मैं बदल लिया |

और बहुत जल्द लगभग 6 महीने में मैं डिप्रेशन से बाहर आ गया |

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अवसाद या चिंता के दौरान आप सभी को किस तरह के शौक रखने पड़ते हैं?

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HOBBIES TO OVERCOME DEPRESSION IN HINDI

जीवन में बहुत सी चीजें हैं लेकिन मैं आपको बता दूं कि हर चीज का प्रभाव होता है।

जिस समय आप अवसाद में होते हैं उस समय कुछ शौक आपको अवसाद को दूर करने में मदद कर सकते हैं।

कुछ शौक आपको मानसिक रूप से मजबूत बना सकते हैं जबकि कुछ शौक आपको दृढ़ता से मानसिक बना सकते हैं।

यहाँ आपके शौक को चुनने के लिए मेरे सुझाव हैं।

  1. प्रतिदिन सूची बनाएँ
  2. अनुशासन का पालन करें
  3. प्रतिदिन स्वयं सहायता पुस्तकें पढ़ें
  4. प्रतिदिन दौड़ने जाओ
  5. बैडमिंटन खेलना
  6. दैनिक ध्यान
  7. दवा के लिए जाओ
  8. अश्लील साहित्य न देखें
  9. आध्यात्मिक मार्ग पर चलें
  10. नकारात्मक प्रभावों से दूर रहें

इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद

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क्या दुख एक अवसाद है ?

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दुखी होना डिप्रेशन नहीं है, लेकिन डिप्रेशन में होना दुख की बात जरूर है |

हम सभी की जिंदगी में सुख-दुख आते रहते हैं, और वर्तमान में हो रहे दुख की वजह से अगर आपको लग रहा है आप Depression में हो तो यह आपका वहम है |

सुख और दुख अस्थाई है, लेकिन डिप्रेशन एक मेंटल स्टेट ( मानसिक अवस्था ) है, जो काफी लंबे समय तक बनी रहती है |

डिप्रेशन एक ऐसी अवस्था है, जो हमने खुद create की और हम ही ऐसे इंसान हैं इस दुनिया में जो अपने आप को डिप्रेशन से बाहर ला सकते हैं |

हां सच में आप ही अपने आप को डिप्रेशन से बाहर ला सकते हैं जिस तरह मैं डिप्रेशन से बाहर आया |

सन 2016 में मैं डिप्रेशन का शिकार था, और आज मैं लोगों को गाइड कर रहा हूं, कि किस तरह आप अपने आप को बदल कर डिप्रेशन से बाहर आ सकते हैं |

मैंने एक e-बुक (Best book on depression) लिखी है, जिसमें मैंने दिखाया कि किस तरह में अपने दैनिक जीवन को बदल कर डिप्रेशन से बाहर आया उसी तरह आप भी डिप्रेशन से बाहर आ सकते हैं |

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मैं अवसाद में क्यों था?

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मुझे पोर्नोग्राफी की लत थी इसलिए मैं डिप्रेशन में था |

जब मैं कॉलेज गया, तो मुझे पहली बार स्मार्टफोन मिला। मैंने अभी-अभी कॉलेज ज्वाइन किया था, कॉलेज के पहले दिन से ही पोर्न स्टोरी देखना और सुनना शुरू कर दिया था।

आप जो खाते हैं वह आपके शरीर को प्रभावित करता है, वैसे ही आप जो देखते / सुनते हैं वह आपके दिमाग को प्रभावित करता है। *

जब हम पोर्न स्टोरी देखते हैं / सुनते हैं, तो हमारे मस्तिष्क के अंदर एक रासायनिक रिलीज होता है जिसे डोपामाइन कहा जाता है, जो मन को बहुत सुकून देता है।

माइंड को जिस तरह के अनुभव पसंद हैं, माइंड उन अनुभवों को और अधिक पाने की कोशिश करता है।

ऐसे में मुझे पोर्न स्टोरीज पढ़ने की बहुत लत थी।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, पोर्नोग्राफी में मेरी रुचि बढ़ती गई।

अब अपने खाली समय में, मैं हर दिन दो-तीन घंटे पोर्न स्टोरी पढ़ता था।

इस दौरान, मुझे एहसास हुआ कि मेरे विचार बदल रहे थे, मेरी यौन इच्छा बहुत अधिक बढ़ने लगी थी, इस दौरान मैं हर समय सेक्स के बारे में सोचता था।

जिसके कारण लड़कियों के प्रति मेरा रवैया बहुत गलत था, मैं बहुत ही घृणित व्यक्ति बन गया था।

इस तरह, मैं समझ नहीं पा रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा है।

इस प्रभाव ने मुझमें गहरी छाप छोड़ी और मैं अवसाद का शिकार हो गया।

अवसाद और अनिद्रा के कारण, मैं ठीक से सो नहीं पा रहा था, बार-बार आत्महत्या के विचार मुझे परेशान कर रहे थे।

मेरी चिंताएं बढ़ने लगीं कि मेरे साथ क्या हो रहा है, कभी-कभी मैं पूरी रात सो नहीं पाता था, इसीलिए मैंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी।

दोस्तों और परिवार से मिलना बंद कर दिया और खुद से बातें करने लगा।

लगभग साढ़े 4 साल पहले मैं अवसाद से उबर गया, अभी मुझे न तो कोई डर है और न ही खेद और अपने अनुभवों को ब्लॉग denxiety.com के माध्यम से लोगों तक साझा कर रहा हूं।

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